बर्फ़ से ढकी ठंडी वादियों में, एक सफ़ेद बैल रोज़ भारी लकड़ियाँ ढोकर अपने मालिक के लिए काम करता था। सर्द हवा में उसका साँस भी धुंआ बन जाता, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की। हर सुबह वह पेड़ों से लदी राहों पर चलता, उसके खुर बर्फ में गहरे निशान छोड़ते। जंगल के जानवर उसे “मेहनती वीर” कहते थे — क्योंकि उसने कभी हार नहीं मानी। एक दिन, रास्ते में उसकी मुलाकात एक बंदर से हुई। बंदर बोला, “इतना बोझ क्यों उठाते हो, भाई?” बैल मुस्कुराया, “क्योंकि यही मेरा कर्म है — मेहनत ही मेरा गर्व है।” शाम तक जब वह लकड़ियाँ गाँव पहुँचाता, तो सूरज की आख़िरी किरणें उसके माथे के पसीने पर चमकतीं — जैसे ईश्वर कह रहे हों, “तू सबसे अमीर है, क्योंकि तेरे पास मेहनत का धन है ।” 🌿💪 इस गाने में जितना भी फोटो देख रहा है वह सब के प्रॉब्लम लिख कर दो इस कहानी में जितना भी इमेज बनने वाला है वह सब इमेज का प्रॉन्प्ट लिखकर दो
25
Views
0
Likes
0
Comments
0
Shares