ज़रूर 🙂 **एक मिनट की कहानी: “गरिब”** सुबह की ठंडी हवा में रमेश चाय की दुकान के बाहर खड़ा था। जेब में सिर्फ़ पाँच रुपये थे, और घर पर माँ भूखी इंतज़ार कर रही थी। दुकान वाला रोज़ की तरह ग्राहकों को चाय परोस रहा था, मगर रमेश की तरफ़ किसी की नज़र नहीं गई। तभी एक आदमी आया, चाय पी और जाते-जाते बोला, “भैया, पैसे बाद में दे दूँगा।” दुकानदार झुंझला गया। रमेश ने चुपचाप अपनी जेब से पाँच रुपये निकाले और काउंटर पर रख दिए। “उसकी चाय के पैसे मैं दे देता हूँ,” उसने कहा। दुकानदार हैरान रह गया। “तू खुद गरिब है, फिर भी?” रमेश मुस्कुराया, “गरिब पैसों से होता है, दिल से नहीं।” शाम को वही आदमी वापस आया, रमेश को काम दिया और हफ़्ते की मज़दूरी हाथ में रख दी। माँ उस रात मुस्कुराकर सोई। और रमेश समझ गया— नेकी कभी खाली नहीं जाती। 🌱, cinematic style, high quality, detailed
0
Views
0
Likes
0
Comments
0
Shares