एक छोटे से गाँव में अम्मा रहती थीं। ज़िंदगी भर मेहनत करके उन्होंने अपने बच्चों को बड़ा किया, पर उम्र ढलने पर वही बच्चे उनसे दूर हो गए। अम्मा रोज़ दरवाज़े की ओर देखतीं—कहीं आज कोई आ जाए… पर कोई नहीं आता। एक शाम बारिश में भीगते हुए उन्होंने आसमान की तरफ देखा और बोलीं, “शायद अब सिर्फ़ भगवान ही मेरा हाल समझते हैं…” और फिर धीरे से अपनी ठंडी चारपाई पर बैठ गईं। बस… उनके आँसू ही उनकी सच्ची संगत बन गए।
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