मध्यप्रदेश की हरियाली से घिरा एक छोटा-सा गांव है — धनखेड़ी। यह गांव भले ही छोटा हो, लेकिन यहां के लोगों के दिल बहुत बड़े हैं ❤️ धनखेड़ी की सुबह किसी मंदिर की घंटी से नहीं, बल्कि खेतों में काम करती औरतों की हंसी और बैलों की घंटियों से होती है। जब सूरज की पहली किरण मिट्टी पर गिरती है, तो जैसे धरती भी मुस्कुरा उठती है ☀️ यहां के लोग मानते हैं कि "मिट्टी से जो जुड़ा, वही सच्चा अमीर है"। हर घर के आगे छोटी-छोटी क्यारियाँ हैं — कोई सब्जी उगा रहा है, कोई फूल, तो कोई तुलसी के पौधे की पूजा कर रहा है 🌸 गांव की औरतें सुबह अपने सिर पर घड़ा रखकर कुएँ से पानी लाती हैं, बच्चे मिट्टी में खेलते हैं, और बुजुर्ग चौपाल पर बैठकर पुराने किस्से सुनाते हैं। यह गांव केवल खेती के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि आपसी प्रेम और सहयोग की मिसाल है। जब कभी किसी के खेत में काम ज्यादा होता है, तो पूरा गांव मिलकर मदद करता है। ना कोई अहंकार, ना कोई लालच — बस अपनापन। बरसात के दिनों में जब बादल धनखेड़ी के ऊपर छा जाते हैं, तो लगता है जैसे आसमान खुद इस गांव को दुलारने आया हो ☁️ मिट्टी की खुशबू से पूरा वातावरण महक उठता है — और हर चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती है। यह वही गांव है जहाँ हर बीज एक उम्मीद बनकर उगता है, हर पौधा एक कहानी कहता है, और हर इंसान प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है 🌱 धनखेड़ी सिर्फ एक जगह नहीं — यह जीवन का एक एहसास है। यहां के लोगों ने सिखाया है कि “खुशी शहरों की भीड़ में नहीं, मिट्टी की खुशबू में मिलती है।”
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