ज़रूर दोस्त! यहाँ एक छोटी-सी, प्यारी-सी हिंदी कहानी है: 🌳 दोस्ती का पेड़ 🌳 एक छोटे से गाँव में दो दोस्त रहते थे—आरव और कबीर। दोनों साथ खेलते, साथ पढ़ते और हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे। एक दिन उन्होंने खेत के किनारे एक छोटा-सा नीम का पौधा लगाया। आरव बोला, “जब यह पेड़ बड़ा होगा, हम इसकी छाया में बैठकर बातें करेंगे।” कबीर ने मुस्कुराते हुए कहा, “और इसकी पत्तियों से दवा भी बनेगी, जिससे लोगों की मदद होगी!” दोनों रोज़ उस पौधे में पानी डालते। गर्मी हो या बारिश, वे कभी इसे भूलते नहीं थे। कुछ साल बीते, और छोटा पौधा अब एक बड़ा, घना पेड़ बन गया। उसकी छाया में बच्चे खेलने लगे, बूढ़े लोग बैठकर आराम करने लगे। एक दिन गाँव के सरपंच ने कहा, “यह पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं, हमारी दोस्ती और मेहनत की मिसाल है।” आरव और कबीर ने एक-दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुरा दिए। उन्हें समझ आ गया कि असली खुशी सिर्फ पेड़ लगाने में नहीं, बल्कि उसे संभालने में है—जैसे दोस्ती को संभालने में होती है। सीख: दोस्ती और पेड़—दोनों को बढ़ने के लिए समय, प्यार और देखभाल की ज़रूरत होती है। अगर चाहो तो मैं दूसरी कहानी भी लिख दूँ—मज़ेदार, प्रेरणादायक, या बच्चों वाली!
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