यह रही एक प्यारी और सीख देने वाली कहानी — "दादी और बंदर की दोस्ती" 🐒👵 --- 🌳 दादी और बंदर की दोस्ती एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव के किनारे एक दादी रहती थीं। उनका नाम था सावित्री दादी। दादी का एक प्यारा-सा घर था जो जंगल के पास था। दादी रोज़ जंगल से लकड़ियाँ लातीं और उनसे चूल्हे पर खाना बनातीं। एक दिन जब दादी जंगल में लकड़ियाँ काट रही थीं, तभी एक शरारती बंदर पेड़ से उतरकर आया। उसने दादी की टोकरी उठाई और भाग गया। 😄 दादी बोलीं, “अरे बंदर बेटा, वो मेरी लकड़ियाँ हैं, मत ले जा।” बंदर हँसते हुए बोला, “ठीक है दादी, अगर तुम मुझे केले खिलाओगी तो मैं लकड़ियाँ लौटा दूँगा।” दादी मुस्कुराईं और बोलीं, “अरे बेटा, मेरे पास केले तो नहीं, लेकिन मैं तुम्हारे लिए मीठे लड्डू बना दूँगी।” यह सुनकर बंदर खुश हो गया और लकड़ियाँ वापस कर दीं। अगले दिन दादी ने सच में **गुड़ और गेहूं के लड्ड
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