वेलकम टू जादुई सपनों की कहानी। बहुत समय पहले की बात है। एक शांत लेकिन उदास हवेली में एक बेहद खूबसूरत और नेक दिल लड़की रहती थी, जिसका नाम हिना था। बचपन में ही उसकी माँ का इंतकाल हो गया था। कुछ साल बाद उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। लेकिन जब हिना 18 साल की हुई, तो उसके पिता भी इस दुनिया से चले गए। अब वह अपनी सौतेली माँ के रहमोकरम पर थी, जिसका नाम रुकैया था। रुकैया के दिल में ममता नहीं, बल्कि जलन और लालच भरा था। हिना के पिता काफी दौलत छोड़ गए थे, मगर रुकैया ने सब अपने कब्जे में कर लिया और हिना को नौकरानी की तरह रखने लगी। हिना हर काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करती, लेकिन रुकैया कभी खुश नहीं होती। एक दिन उसने 25 किलो चावल में रेत और छोटे पत्थर मिला दिए और सख्ती से कहा: “अगर शाम तक ये साफ नहीं हुए, तो सजा के लिए तैयार रहना।” हिना रोते हुए चावल चुनने लगी। तभी कमरे में हल्की सी सुनहरी रोशनी फैली। उसके सामने एक सुंदर परी प्रकट हुई, जिसका नाम ज़रीन था। ज़रीन ने मुस्कुराकर कहा, “डरो मत, हिना। मैं तुम्हारी मदद करने आई हूँ।” कुछ ही पलों में चावल साफ हो गए। रुकैया हैरान तो हुई, मगर उसने अगली चाल चली। वह हिना को एक बड़े तालाब के पास ले गई और एक छेद वाला कटोरा देकर बोली: “इसे इस्तेमाल करके तालाब खाली करो।” हिना फिर मायूस हुई, मगर ज़रीन दोबारा आई। उसने जादुई छड़ी घुमाई और तालाब का पानी बादलों में बदल गया। अब रुकैया ने आखिरी इम्तिहान रखा — “शाम तक इस मैदान में एक महल बना दो!” हिना ने आसमान की तरफ देखा। ज़रीन फिर आई और कुछ ही देर में वहाँ संगमरमर का शानदार महल खड़ा हो गया। जब रुकैया तहखाने की जांच करने उतरी, तो फिसलकर नीचे गिर गई। उसकी साज़िशें वहीं खत्म हो गईं। अब वह महल पूरी तरह हिना का था। कुछ समय बाद उस महल की चर्चा दूर-दूर तक फैल गई। एक दिन पड़ोसी राज्य का शहजादा आरिज़ वहाँ आया। उसकी बातें सच्ची और दिल को छू लेने वाली थीं। धीरे-धीरे हिना को उससे मोहब्बत हो गई। महल के बाग में एक नींबू का पेड़ था। वहीं आरिज़ ने कहा: “मैं अपने वालिद से इजाज़त लेकर जल्द लौटूंगा। यहीं मेरा इंतज़ार करना।” मगर जब वह अपने राज्य पहुँचा, तो वहाँ उसकी बचपन की दोस्त शहजादी समरा मौजूद थी। समरा दिल ही दिल में आरिज़ से मोहब्बत करती थी। उसने चाल चली और जादुई पेय में भूलने का मंत्र मिला दिया। आरिज़ वह पेय पीते ही हिना को भूल गया। हिना तीन दिन इंतजार करती रही। फिर उसने फैसला किया कि वह खुद आरिज़ को ढूंढेगी। वह अपने तीन जादुई लिबास लेकर निकल पड़ी — एक चांद जैसा, एक सूरज जैसा, और एक सितारों जैसा। कई सालों बाद उसे पता चला कि आरिज़ की शादी समरा से होने वाली है। पहली रात वह सूरज वाला लिबास पहनकर जश्न में गई। सब उसकी खूबसूरती देखकर दंग रह गए। आरिज़ उसकी तरफ खिंचता चला आया, मगर पहचान न सका। दूसरी रात वह चांद वाला लिबास पहनकर आई। आरिज़ और बेचैन हुआ। तीसरी रात वह सितारों वाला लिबास पहनकर आई। जब उसने आरिज़ के बाएं हाथ को चूमा, तो सारी यादें लौट आईं। आरिज़ की आँखों से जादू का असर खत्म हो गया। उसने सबके सामने कहा: “मेरी सच्ची मोहब्बत हिना है।” समरा की साज़िश बेनकाब हो गई। कुछ ही दिनों में हिना और आरिज़ की शाही शादी हुई। पूरा राज्य खुशियों से झूम उठा। कुछ समय बाद उनके घर एक बेटे ने जन्म लिया, जिसका नाम उन्होंने रायान रखा। और इस तरह हिना ने दुखों से निकलकर मोहब्बत और खुशियों भरी ज़िंदगी पाई। सीख: सच्ची मोहब्बत और सब्र हर जादू से ज्यादा ताकतवर होते हैं।
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