एक दिन जंगल की सभा बुलाई गई। सभी जानवर पुराने बरगद के नीचे इकट्ठा हुए।
शेर गरजा —
“मैं शेर हूँ! मेरी... - AI Avatar by pratik gudekar | Percify AI Avatar Generator

एक दिन जंगल की सभा बुलाई गई। सभी जानवर पुराने बरगद के नीचे इकट्ठा हुए। शेर गरजा — “मैं शेर हूँ! मेरी दहाड़ से पूरा जंगल काँप उठता है। मेरी ताकत से कोई मुकाबला नहीं कर सकता। इसलिए राजा तो मैं ही हूँ!” सभी जानवर डर गए, कुछ ने सिर झुका लिया। लेकिन तभी हाथी ने अपनी सूँड़ ऊँची उठाई — “सिंह भाई, ताकत अकेले सब कुछ नहीं होती। मैं तुमसे भी बड़ा और भारी हूँ। अगर मैं चाहूँ, तो एक कदम से तुम्हें दबा दूँ। तो क्या मैं राजा नहीं?” बंदर पेड़ से झूलते हुए बोला — “राजा वो होना चाहिए जो सबसे चालाक हो! मैं किसी भी जाल से बच सकता हूँ, किसी भी पेड़ पर चढ़ सकता हूँ। मेरी बुद्धि और गति तुम दोनों से तेज़ है।” जंगल में हलचल मच गई। हर कोई खुद को श्रेष्ठ साबित करने में लगा था। 🦜 दूसरा अध्याय — बुज़ुर्ग उल्लू की बात तभी, ऊपर पेड़ की शाखा पर बैठा एक बूढ़ा उल्लू बोला — “राजा वो नहीं होता जो सबसे ताकतवर या चालाक हो… राजा वो होता है जो अपने प्रजा की रक्षा करे, सबके बीच न्याय करे, और जंगल में शांति बनाए रखे।” सभी जानवर चुप हो गए। उल्लू ने आगे कहा — “अगर तुम सब सच में राजा बनना चाहते हो, तो अपनी योग्यता साबित करो — लेकिन युद्ध से नहीं, कर्म से।” सभा ने तय किया कि अगले सात दिनों तक हर जानवर को अपने कर्मों से यह दिखाना होगा कि कौन जंगल का सच्चा राजा बनने योग्य है। 🌳 तीसरा अध्याय — परीक्षा की शुरुआत पहले दिन शेर शिकार पर निकला। उसने एक हिरण को पकड़ लिया, पर सोचा — “अगर मैं सबका राजा बनना चाहता हूँ, तो क्या मुझे अपनी प्रजा को मारना चाहिए?” उसने हिरण को छोड़ दिया। मगर भूख से तिलमिलाते शेर ने खुद से कहा — “राजा बनने से पहले मैं खुद भूखा मर जाऊँगा।” दूसरे दिन हाथी ने अपने बल का प्रदर्शन किया। उसने गिरे हुए पेड़ों को रास्ते से हटाया, ताकि छोटे जानवर आसानी से जा सकें। सभी ने उसकी मदद की सराहना की। तीसरे दिन बंदर ने सबके लिए फल इकट्ठा किए और झरने के पास बाँट दिए। लेकिन उसकी शरारतों से कुछ पक्षी नाराज़ हो गए, क्योंकि वह उनकी डालियाँ हिला रहा था। हर जानवर अपनी-अपनी योग्यता दिखाने में जुटा था, लेकिन किसी के पास सबको जोड़ने की शक्ति नहीं थी। 🐍 चौथा अध्याय — खतरा सातवें दिन की सुबह जंगल पर संकट आ गया। पहाड़ों से नीचे उतरते हुए इंसानों का एक दल आया, जो पेड़ों को काटने और जानवरों को पकड़ने लगा। शोर, डर और अफरा-तफरी फैल गई। हिरण भागने लगे, पक्षी आसमान में उड़ गए, बंदर पेड़ों पर चढ़ गए। लेकिन शेर, हाथी और कुछ बहादुर जानवर वहीं रुक गए। शेर गरजा — “अगर अब हम नहीं लड़े, तो हमारा जंगल खत्म हो जाएगा!” हाथी ने सहमति जताई — “हम सबको मिलकर इन इंसानों को रोकना होगा। जंगल किसी एक का नहीं, सबका है।” शेर, हाथी, भालू, बंदर और सैकड़ों जानवरों ने मिलकर योजना बनाई। ⚔️ पाँचवाँ अध्याय — एकता की ताकत शेर और भालू ने इंसानों को डराने के लिए जोरदार दहाड़ लगाई। बंदरों ने ऊपर से पत्थर और फल गिराए, तो हाथियों ने अपने भारी शरीर से रास्ता रोक दिया। पक्षियों ने इंसानों की आँखों के सामने झपटे मारे। इंसान डर गए और भाग खड़े हुए। जब सब शांत हुआ, तो पूरा जंगल खुशियों से गूंज उठा। हर जानवर खुशी में झूम उठा — “हम जीत गए! हमारा जंगल सुरक्षित है!” बूढ़ा उल्लू नीचे उतरा और बोला — “आज मैंने देखा कि असली राजा कौन है।” सभी जानवर चुप हो गए। उल्लू ने मुस्कराते हुए कहा — “तुम सब राजा हो, क्योंकि तुमने मिलकर अपने घर की रक्षा की है। लेकिन इस एकता का नेतृत्व किसने किया?” सभी की नज़रें शेर पर गईं। 👑 छठा अध्याय — सच्चे राजा का ताज शेर ने विनम्रता से कहा — “मैंने तो सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभाई है। असली ताकत तो इस जंगल की एकता में है। अगर हाथी, बंदर, भालू और पक्षी मेरे साथ न होते, तो मैं कुछ भी नहीं कर पाता।” उल्लू ने कहा — “यही बात तुम्हें राजा बनाती है, सिंह! जो अपने गर्व को छोड़कर सबको साथ ले चले — वही सच्चा राजा है।” सभी जानवरों ने तालियाँ बजाईं (या यूँ कहो, अपनी आवाज़ों से स्वागत किया)। उस दिन से शेर को ‘जंगल का राजा’ घोषित किया गया — मगर इस बार डर से नहीं, सम्मान से।

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Oct 26, 2025
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