ज़रूर! यहाँ एक सुंदर, दिलचस्प और लगभग 10–15 मिनट की पढ़ने लायक कहानी दी गई है— दो दोस्तों, गांव, जंगल, और झरना पर आधारित। भाषा सरल, प्यारी और पूरी तरह समझने लायक है। --- 🌿 दो दोस्तों की जंगल-झरने वाली जादुई यात्रा (10–15 मिनट की कहानी) एक समय की बात है, पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा-सा प्यारा गाँव था—मधुवन। इस गाँव में दो गहरे दोस्त रहते थे—राहुल और करण। दोनों बचपन से ही एक साथ खेलते, पढ़ते और सपने देखते थे। राहुल थोड़ा शांत स्वभाव का था, लेकिन प्रकृति का बहुत प्रेमी। पेड़-पौधे, नदी-झरने, जानवर—सब उसका मन खुश कर देते थे। वहीं करण शरारती, हंसमुख और हमेशा रोमांच (adventure) की तलाश में रहता था। एक रविवार की सुबह दोनों ने तय किया कि आज वे गांव के पीछे वाले घने जंगल में घूमने जाएंगे। सुना था वहाँ बहुत अंदर एक सुंदर झरना है, लेकिन वहाँ तक पहुँचना थोड़ा मुश्किल है। फिर भी दोनों की आंखों में उत्साह था— “चल न यार, आज झरना देखते हैं!” करण बोला। राहुल मुस्कुराया, “ठीक है दोस्त, रोमांच भी और मज़ा भी।” --- 🌲 जंगल की ओर सफ़र शुरू सुबह-सुबह दोनों ने अपने बैग में खाना, पानी और एक छोटा सा फर्स्ट-एड बॉक्स रखा। राहुल ने रास्ते के लिए एक नक्शा भी लिया, जो उसके दादाजी ने बनाया था। जैसे ही दोनों जंगल के अंदर गए, ठंडी हवा ने उनका स्वागत किया। पेड़ों से छनकर आती धूप जमीन पर सुनहरे डिज़ाइन बना रही थी। पक्षियों की चहचहाट और पत्तों की सरसराहट एक मधुर संगीत जैसा लग रहा था। “वाह! कितना सुंदर है ये जंगल!” राहुल ने कहा। करण ने हँसते हुए कहा, “लेकिन ध्यान रखना, कहीं रास्ता न भूल जाएं।” राहुल बोला, “रास्ता तो मैं संभाल लूंगा… तुम अपनी शरारतें संभाल लेना!” दोनों हँस पड़े। --- 🌱 रहस्यमयी रास्ते पर थोड़ा आगे बढ़े तो रास्ता थोड़ा तंग और घुमावदार हो गया। पेड़ों की शाखाएँ रास्ते को ढक रही थीं। कभी-कभी दूर से बंदर की आवाज़ आती, कभी मोर पुकारता। करण ने अचानक एक पत्थर उठाकर कहा, “क्या पता खज़ाना मिल जाए!” राहुल बोला, “तू हमेशा फ़िल्मों वाला सोचता है।” “अरे कभी-कभी फ़िल्में सच भी हो जाती हैं!” करण ने आंखें चमकाईं। आगे बढ़ते-बढ़ते उन्हें एक टूटा हुआ लकड़ी का पुल मिला। पुल के नीचे छोटी-सी धारा बह रही थी। राहुल बोला, “सावधानी से चलना, ये पुराना पुल है।” करण ने कहा, “पहले मैं जाता हूँ, मैं हल्का हूँ।” राहुल हँस के बोला, “हाँ तू हवा जैसा है!” दोनों धीरे-धीरे पुल पार कर जाते हैं। --- 🌟 अनोखा जानवर और रास्ता बदलना जंगल के और अंदर जाने पर उन्हें एक आवाज़ सुनाई दी— “कुर्र… कुक… कूक!” दोनों ने देखा एक सुंदर नीली गिलहरी एक पेड़ पर बैठी थी। उसके शरीर पर हल्की नीली चमक थी। राहुल बोला, “ये कैसी गिलहरी है? मैंने कभी नहीं देखी!” गिलहरी उन्हें देखकर जैसे रास्ता दिखाने लगी। वह एक डाल से दूसरी डाल की तरफ कूद रही थी। करण बोला, “लगता है ये हमें झरने तक ले जाएगी!” “चलो इसका पीछा करते हैं।” राहुल ने कहा। दोनों उसके पीछे-पीछे चल पड़े। --- 💦 जंगल का जादुई झरना करीब आधे घंटे चलने के बाद अचानक पेड़ हटे और सामने से एक सुंदर, चमकदार झरना दिखाई दिया। सूरज की रोशनी
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